बीतती रात
इक रात देखता रहा तेरी तस्वीर
कमरे के एक कोने में
याद नहीं क्या सोच रहा था
रात के उस सोने में
डर लगा
डर लगा कुछ भूल न जाऊं
इस बीतती रात के अंधेरे में
थोडी देर और देख लूँ
थोड़ा जी और भर लूँ
कहीं यह मुस्कान मिट न जाए
सुबह के कुछ होने से
कमरे के एक कोने में
याद नहीं क्या सोच रहा था
रात के उस सोने में
डर लगा
डर लगा कुछ भूल न जाऊं
इस बीतती रात के अंधेरे में
थोडी देर और देख लूँ
थोड़ा जी और भर लूँ
कहीं यह मुस्कान मिट न जाए
सुबह के कुछ होने से
Labels: लव
4 Comments:
wow!!!
kammal..abey tu auyr hindi..bhai ..kya..kya hai tu..cheez kya hai tu yeh bata..
hahaha... abe pehle yeh bata jo likah hai .. woh kaisa hai??
MAst likha hai bhai..I never expected that from you atleast..English mein tho theekh tha..but HINDI..jai ho jai ho YOGI bhai ki..
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